कौन सुनेगा कुशेश्वरस्थान के 200 किसानों का दर्द? 500 एकड़ जमीन पर जलजमाव से रबी फसल की उम्मीद खत्म

कौन सुनेगा कुशेश्वरस्थान के 200 किसानों का दर्द? 500 एकड़ जमीन पर जलजमाव से रबी फसल की उम्मीद खत्म

हिंदुस्तान लाइव न्यूज:-

किसानों का कहना है कि अगर वे अगली फसल नहीं लगाएंगे तो कहां से खाएंगे? उनके सामने भुखमरी की स्थिति आ जाएगी. स्थानीय किसान रामविलास मुखिया ने कहा कि यहां हर साल बाढ़ (Flood Water) का पानी आता है, लेकिन रबी फसल लगाने के पहले पानी पुल के नीचे से निकल जाता है. \

Darbhanga: दरभंगा जिले के कुशेश्वरस्थान उपचुनाव में राजनीतिक दांव-पेच, वादों और दावों का खेल चरम पर है. वहीं, दूसरी तरफ करीब 200 अन्नदाता किसानों का दर्द है जिस पर किसी का ध्यान नहीं है. कुशेश्वरस्थान पूर्वी प्रखंड की केवटगामा पंचायत में करीब 500 एकड़ खेतों में 2 से 3 फीट तक पानी जमा है. इस जमीन पर हर साल किसान मक्के की फसल लगाते थे, लेकिन इस बार इन किसानों की रबी (Rabi Crop) की फसल लगाने की आस टूट रही है.

'फसल नहीं लगाएंगे तो कहां से खाएंगे'?
किसानों का कहना है कि अगर वे अगली फसल नहीं लगाएंगे तो कहां से खाएंगे? उनके सामने भुखमरी की स्थिति आ जाएगी. स्थानीय किसान रामविलास मुखिया ने कहा कि यहां हर साल बाढ़ (Flood Water) का पानी आता है, लेकिन रबी फसल लगाने के पहले पानी पुल के नीचे से निकल जाता है. उन्होंने बताया कि इस इलाके में यातायात बहाल करने के लिए ठेकेदार ने सड़क बनाई है और पुल के पास रोड़ा और मिट्टी डालकर डायवर्सन बना दिया है. इसकी वजह से यह पानी खेतों में ही रुक गया है.

'पुल का निर्माण होता तो नहीं डूबते खेत'
रामविलास मुखिया ने बताया कि अगर ठेकेदार ने जल्दी काम खत्म किया होता और डायवर्सन की बजाए जल्द पुल का निर्माण हो जाता तो उनके खेत नहीं डूबते और वे रबी की फसल लगा पाते. उन्होंने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से गुहार लगाई कि केवटगामा पंचायत की करीब 500 एकड़ जमीन से पानी निकाला जाए ताकि वे लोग खेती कर सकें और अपने परिवार का पेट पाल सकें.

'फसल नहीं हुई तो भुखमरी की समस्या पैदा हो जाएगी'
वहीं, एक अन्य किसान शंकर यादव ने कहा कि अगर रबी की फसल नहीं लगाएंगे तो खाएंगे क्या? उन्होंने कहा कि इलाके में करीब 200 ऐसे किसान हैं जिनके खेत में 2 से 3 फीट पानी भरा हुआ है. ऐसे में खेती संभव नहीं है. शंकर का कहना है कि अगर फसल नहीं हुई तो उनके सामने भुखमरी की समस्या पैदा हो जाएगी.

'किसानों का दर्द सुनने वाला कोई नहीं'
उन्होंने सरकार से जल्द पानी निकालने की गुहार लगाई है. वहीं, स्थानीय सुरेंदर ने कहा कि पक्ष-विपक्ष सभी उपचुनाव में लगे हैं, किसानों का दर्द सुनने वाला कोई नहीं है.