किरायेदार मकान खाली नहीं कर रहा हो तो क्या करें?

किरायेदार मकान खाली नहीं कर रहा हो तो क्या करें?

दीपा सिंह सरकारी नौकरी से रिटायर हो चुकी हैं. दिल्ली में वह अच्छे इलाके में रहती हैं. उनका सीआर पार्क में अपना घर है. उनके बच्चे विदेश में रहते हैं. वह पति के साथ रहती हैं. करीब दो साल पहले उन्होंने घर के दूसरे फ्लोर को किराये पर देने का फैसला किया.

रेंट एग्रीमेंट की अवधि दो साल थी. छह महीने बाद किरायेदार ने मकान मालिक को बिना बताए घर में एक और व्यक्ति को बुला लिया. फ्लोर के इंटीरियर को भी बदल दिया.

इस पर मकान मालिक ने आपत्ति की. उन्होंने किरायेदार को घर खाली करने को कहा. लेकिन, इसे किरायेदार ने अनसुना कर दिया.

इसे देखते हुए कोर्ट में मामला दायर किया गया. मुकदमा चल रहा है. कई मकान मालिकों को इस तरह की समस्या का सामना करना पड़ता है.

किरायेदार को घर खाली कराने के लिए सिंह जैसे मकान मालिकों को क्या करना चाहिए?

बेदखली के लिए मुकदमा रेंट एग्रीमेंट मकान मालिक और किरायेदार के बीच कॉन्ट्रैक्ट होता है. यह अहम दस्तावेज है. इसमें प्रॉपर्टी को किराए पर देने की शर्तें होती हैं.

इसमें बताया जाना चाहिए कि किराए पर दी जाने वाली प्रॉपर्टी का कैसे इस्तेमाल किया जाएगा. किरायेदारी की अवधि और हर महीने के किराये का भी साफ जिक्र होना चाहिए.
मकान खाली करने की शर्तें भी लिखी जानी चाहिए ताकि विवाद की स्थिति में इनका इस्तेमाल किया जा सके.
इससे आप कॉन्ट्रैक्ट के उल्लंघन का हवाला देते हुए मकान खाली कराने का आधार बना सकते हैं.

सुप्रीम कोर्ट में वकील कुमार मिहिर कहते हैं कि किरायेदार से घर खाली कराने के दो तरीके हैं.
एक, रेंट एग्रीमेंट खत्म हो चुका हो.
दूसरा, ट्रांसफर आफ प्रॉपर्टी एक्ट के सेक्शन 106 के तहत कानूनी नोटिस भेजकर मकान मालिक लीज को रद्द कर दे.

दोनों ही मामलों में यदि किरायेदार घर खाली करने से मना करता है तो मकान मालिक को जिला अदालत में बेदखली का मुकदमा दायर कर आदेश लेना पड़ेगा.

किराया नहीं दिया गया है कई मामलों में किरायेदार किराया देना रोक देते हैं. लेकिन, प्रॉपर्टी पर कब्जा बनाए रखते हैं.

कभी-कभार विवाद का कारण किराये का बढ़ना होता है. मकान मालिक रेंट एग्रीमेंट में तय शर्त के अनुसार किराये को बढ़ा सकता है.

यदि किरायेदार एक साल बाद बढ़ा हुआ किराया देने से मना करता है तो मकान मालिक प्रॉपर्टी को खाली करने के लिए कह सकता है.

हालांकि, किराये में मनमानी बढ़ोतरी को किरायेदार देने से मना कर सकता है.

रेंट एग्रीमेंट का उल्लंघन रेंट एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर करने से पहले किरायेदार और मकान मालिक दोनों को उसे अच्छी तरह से पढ़ लेना चाहिए.

दोनों में से किसी की ओर से उल्लंघन होने पर कॉन्ट्रैक्ट खत्म हो जाता है. प्रॉपर्टी का इस्तेमाल कैसे होगा, इसका एग्रीमेंट में साफ उल्लेख होना चाहिए.

कॉन्ट्रैक्ट का उल्लंघन होने पर मकान मालिक किरायेदार को नोटिस भेज सकते हैं. किसी भी तरह के उल्लंघन की अनदेखी नहीं करनी चाहिए.

यदि आपको किरायेदार के व्यवहार के खिलाफ या प्रॉपर्टी से कोई आपराधिक गतिविधि चलाने की शिकायत मिलती है तो यह आपकी जिम्मेदारी होगी.

इसलिए बतौर मकान मालिक आपको अपने अधिकारों और कर्तव्यों की जानकारी होनी चाहिए.

रेंट कंट्रोल एक्ट के बारे में जान लें किरायेदार के साथ आपके कानूनी रिश्ते होते हैं. जिस राज्य में आप रहते हैं, उसके स्थाानीय कानूनों से ये नियंत्रित होते हैं.

अपने राज्य के रेंट कंट्रोल एक्ट को जान लें. इनमें बेदखली की प्रक्रिया का पता लगाएं.

यह जानकारी रेंट एग्रीमेंट की ड्राफ्टिंग से पहले ही कर लेनी चाहिए.

मकान मालिक को घर खाली कराने के लिए गैर-कानूनी तरीकों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.

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