DRDO ब्रह्मोस मिसाइल के लिए जाना जाएगा लखनऊ ,10000 लोगों को मिल सकेगा रोज़गार।

DRDO ब्रह्मोस मिसाइल के लिए जाना जाएगा लखनऊ ,10000 लोगों को मिल सकेगा रोज़गार।

ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल को DRDO भारत सरकार तथा NPOM , रूस सरकार के संयुक्त उपक्रम ब्रह्मोस एरोस्पेस द्वारा परिकल्पित, विकसित एवं उत्पादित किया जा रहा है। वर्तमान में भारतीय थल, जल एवं वायु सेना द्वारा इसका उपयोग किया जा रहा है। ब्रह्मोस के नेक्स्ट जेनरेशन मिसाइल के उत्पादन के लिए लगभग 200 एकड़ भूमि की आवश्यकता होगी। इस परियोजना को पूर्ण करने के लिए लगभग 300 करोड़ रुपये की धनराशि निवेशित की जाएगी। भूमि उपलब्ध होने के 3 माह के अन्दर सिविल निर्माण कार्य प्रारम्भ कर दिया जाएगा। इस परियोजना के माध्यम से लगभग 500 अभियन्ताओं और तकनीशियनों को प्रत्यक्ष रूप से तथा 5,000 लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्राप्त होगा। ब्रह्मोस के नेक्स्ट जेनरेशन मिसाइल के उत्पादन की योजना के लिए एन्सिलरी यूनिट्स भी स्थापित होंगी जिसके माध्यम से लगभग 10,000 लोगों को रोजगार मिलेगा।

मुख्यमंत्री योगी से उनके सरकारी आवास पर ब्रह्मोस एरोस्पेस के CEO/MD डॉ0 सुधीर कुमार मिश्रा ने मुलाक़ात के दौरान जानकारी देते हुए बताया की उत्तर प्रदेश डिफेंस इण्डस्ट्रियल कॉरिडोर के तहत लखनऊ में ब्रह्मोस के नेक्स्ट जेनरेशन मिसाइल के उत्पादन की योजना है।

राजधानी लखनऊ में ब्रह्मोस मिसाइल का निर्माण होने से उत्तर प्रदेश देश का एरोस्पेस और डिफेंस हब बनने की ओर तेजी से अग्रसर होगा। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में लखनऊ वैश्विक मानचित्र पर स्थापित होगा। इस परियोजना से डिफेंस कॉरिडोर को गति मिलेगी। ब्रह्मोस मिसाइल के विभिन्न सिस्टम तथा सब-सिस्टम के निर्माण से जुड़ी 200 से अधिक औद्योगिक इकाइयां भी परियोजना के निकट अपनी उत्पादन इकाइयां स्थापित करने की ओर अग्रसर होंगी।

ब्रह्मोस मिसाइल : एक संक्षिप्त परिचय

भारत और रूस ने संयुक्त रूप से मिसाइल को विकसित किया है, रूस का हिस्सा 49.5 फीसदी और भारत का हिस्सा 50.05 फीसदी।

450 किमी तक की रेंज और 200 किलो का पारंपरिक वॉरहेड ले जाने की क्षमता रखती है मिसाइल।

नौ मीटर लंबी और 670 मिमी व्यास वाली मिसाइल का कुल वजन लगभग तीन टन है।

14 किमी तक की ऊंचाई तक जा सकती है और 20 किमी की दूरी पर मार्ग बदल लेती है।