कानपुर में डॉक्टरों ने रच दिया इतिहास, Black Fungus के दो मरीजों को ऑपरेशन कर बचाया

कानपुर के हैलट अस्पताल में पहली बार ब्लैक फंगस के दो संक्रमितों का ऑपरेशन करके नेत्र रोग एवं ईएनटी विभाग के डॉक्टरों की टीम ने इतिहास रच दिया है। पीड़ित युवक की आंख और महिला का साइनस निकाला गया है।

कानपुर में डॉक्टरों ने रच दिया इतिहास, Black Fungus के दो मरीजों को ऑपरेशन कर बचाया

जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के हैलट अस्पताल के ईएनटी एवं नेत्र रोग विभाग के डॉक्टरों ने इतिहास रच दिया है। पहली बार ब्लैक फंगस यानी म्यूकर माइकोसिस से संक्रमितों का सफल ऑपरेशन किया है। पीडि़त युवक की सर्जरी कर आंख निकाली जबकि 59 वर्षीय महिला का साइनस निकाला गया है। सर्जरी के बाद दोनों मरीजों को एंटी फंगल इंजेक्शन भी शुरू कर दिए गए हैं। ब्लैक फंगस के लक्षण वाले चार मरीजों के नेजल टिश्यू लेकर बायोप्सी की जांच के लिए माइक्रोबायोलॉजी विभाग में माइक्रोस्कोपिक जांच के लिए भेजे गए हैं।

प्राचार्य प्रो. आरबी कमल ने बताया कि 30 वर्षीय हर्ष गौतम की आंख बचाने का भरसक प्रयास किया गया, लेकिन इंफेक्शन साइनस से लेकर आंख तक फैल चुका था। उसके ब्रेन को बचाने के लिए आंख निकालनी पड़ी। सर्जरी के बाद आंख एवं साइनस को पूरी तरह साफ कर दिया गया। वहीं, 59 वर्षी महिला उर्मिला की आंख और साइनस तक संक्रमण फैला हुआ था। सर्जरी के दौरान आंख में कम संक्रमण होने पर उसकी सफाई की गई है। नाक में संक्रमण होने पर साइनस को हटा दिया गया है। सर्जिकल टीम को प्राचार्य प्रो. आरबी कमल, उप प्राचार्य प्रो. रिचा गिरि एवं प्रमुख अधीक्षक डॉ. ज्योति सक्सेना ने बधाई दी है।

ऑपरेशन में शामिल रहे डॉक्टर : ईएनटी से डॉ. एसके कनौजिया, डॉ. निशांत सक्सेना, डॉ. अमृता श्रीवास्तव, नेत्र रोग की टीम में डॉ. शालिनी मोहन, डॉ. नम्रता पटेल, डॉ. प्रियेश।

शुरुआती अवस्था में ब्लैक फंगस के लक्षण को पहचान कर इलाज करना जरूरी है। ऐसा करने से इंफेक्शन आंख से होते हुए मस्तिष्क तक नहीं पहुंच पाता है। न ही बीमारी बढ़ पाती है और न ही आंख और साइनस निकालने की नौबत आती है।

 डॉ. शालिनी मोहन, एसोसिएट प्रोफेसर, नेत्र रोग विभाग

अगर कोरोना का संक्रमण हुआ है, साथ ही अनियंत्रित डायबिटीज है। ऐसी स्थिति में अपनी नाक की जांच जरूर कराते रहें। अगर किसी प्रकार के फंगस का संदेह हो तो तत्काल ईएनटी विशेषज्ञ को दिखाएं। शुरुआत में पहचान कर इलाज कराने से इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।

डॉ. एसके कनौजिया, विभागाध्यक्ष, नाक कान गला विभाग।