मुसीबत: एक ही मरीज में ब्लैक-व्हाइट फंगस, कोरोना से 49 फीसदी मृत्युदर-

1-उत्तर प्रदेश , मध्यप्रदेश , बिहार सहित कुछ ही राज्यों में मिले हैं ऐसे दुर्लभ केस  2-स्वास्थ्य मंत्रालय, आईसीएमआर और राज्यों का पूरा ध्यान ब्लैक फंगस पर 3-कई राज्यों में ब्लैग फंगस महामारी घोषित

मुसीबत: एक ही मरीज में ब्लैक-व्हाइट फंगस, कोरोना से 49 फीसदी मृत्युदर-

कोरोना के बीच ब्लैक और व्हाइट फंगस की दस्तक बेचैन कर रही है। अभी तक स्वास्थ्य मंत्रालय, आईसीएमआर और राज्य सरकारों का ध्यान ब्लैक फंगस पर था, लेकिन हाल ही में पता चला है कि एक ही मरीज में ब्लैक और व्हाइट फंगस दोनों एकसाथ मिल रहे हैं। 

चिकित्सकी लिहाज से यह स्थिति काफी गंभीर होती है जिसमें मौत की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। उधर कोरोना महामारी से ब्लैक फंगस की तुलना करते हुए बताया है कि वर्तमान में ब्लैक फंगस का हर दूसरा या तीसरा मरीज बचा पाना मुश्किल हो रहा है। 

दिल्ली सहित कुछ राज्यों में कोरोना से 49 फीसदी अधिक ब्लैक फंगस की मृत्युदर दर्ज की गई है। कोरोना की वर्तमान मृत्युदर 1.12 फीसदी है। जबकि ब्लैक फंगस की मृत्युदर कहीं 30 से 40 तो कहीं 40 से 50 फीसदी तक दर्ज की गई है।  

देश में करीब तीन लाख लोगों की कोरोना संक्रमण से मौत हुई है। चूंकि ब्लैक-व्हाइट फंगस की मौत अभी तक राष्ट्रीय स्तर पर दर्ज नहीं की जा रही थी। इसलिए सटीक जानकारी में समय लगेगा, लेकिन अंदेशा है कि अब तक दो हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। 

वैज्ञानिक सुबूत कम, अस्पताल भी नहीं दे रहे जानकारी 
कोरोना रोगी या रिकवर होने वालों में ब्लैक और व्हाइट फंगस के वैज्ञानिक सुबूत अभी तक बहुत कम हैं। इसकी वजह से विशेषज्ञ ठोस निष्कर्ष तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। अस्पताल भी इसमें सहयोग नहीं कर रहे हैं। जिन अस्पतालों में तीन-चार सप्ताह से रोगी भर्ती हैं, उनकी केस स्टडी के आधार पर कुछ संभावना तलाशी जा सकती है। 

ब्लैक के साथ व्हाइट फंगस बढा रहा चिंता  
केंद्र सरकार के आईडीएसपी की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार मध्यप्रदेश, बिहार, तमिलनाडु सहित कुछ राज्यों में यह देखने को मिल रहा है कि एक ही मरीज में ब्लैक और व्हाइट फंगस है और मरीज हाल ही में कोरोना संक्रमण से ठीक हुआ है।  

गाजियाबाद में एक ही अस्पताल में भर्ती आठ मरीजों में ब्लैक के साथ व्हाइट फंगस की पुष्टि हुई है। दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में छोटी आंत में मिले फंगस जैसे दुर्लभ केस भी शामिल। हालांकि, अंतिम रिपोर्ट में आने में अभी वक्त लगेगा।  

स्टेरॉयड, मधुमेह के अलावा भी बहुत कुछ 
दिल्ली एम्स के रूमेटोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. उमा कुमार ने सोशल मीडिया पर लिखा था कि वे अब तक लाखों मरीजों को स्टेरॉयड दे चुकी हैं, लेकिन ऐसा कभी देखने को नहीं मिला।  

इसके पीछे शायद एक कारण औद्योगिक ऑक्सीजन का इस्तेमाल भी हो सकता है। वहीं एम्स के ही डॉ . शरत चंद्र का कहना है कि इसके पीछे दोबारा से इस्तेमाल होने वाले घटिया गुणवत्ता वाले मास्क भी कारण हो सकते हैं। 

फंगस का कहर 

  • दिल्ली एम्स के डॉक्टरों के अनुसार ब्लैक फंगस की मृत्युदर करीब 50 फीसदी।
  • बिहार, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र में अब तक 35 से 40 फीसदी की मौत।
  • राष्ट्रीय राजधानी में समय पर उपचार या इंजेक्शन न मिलने से अलग अलग अस्पतालों में 20 से ज्यादा की मौत। 
  • हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भी चल रही निगरानी, रिपोर्ट का इंतजार।
  • देश में नौ हजार से ज्यादा ऐसे मामले जिनमें ब्लैक और व्हाइट फंगस दोनों। 50-55 फीसदी मरीजों की आयु 30 से 45 वर्ष के बीच।
  • जोधपुर एम्स , दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज के अनुसार हर दूसरे मरीज में करना पड़ रहा ऑपरेशन

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