शहादत : बेटे की टी-शर्ट पहनकर पिता ने दी अंतिम सलामी, बोले -अरे कोई निशानी तो छोड़ जाता अभिनव

शहादत : बेटे की टी-शर्ट पहनकर पिता ने दी अंतिम सलामी, बोले -अरे कोई निशानी तो छोड़ जाता अभिनव

मेरठ में शनिवार सुबह नौ बजे जैसे ही गंगासागर में शहीद अभिनव चौधरी का तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर पहुंचा तो परिजन दहाड़ मारकर रोने लगे। वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम थीं। सभी यही कर रहे थे कि हे भगवान तुमने परिवार को पहाड़ जैसा दुख दे दिया। मां, बहन और पिता पार्थिव शरीर को देखकर बेसुध हो गए। पिता सतेंद्र चौधरी ने अभिनव को स्कूली शिक्षा राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेज देहरादून के समय मिली टी-शर्ट पहनकर सलामी दी। उन्होंने अभिनव के पार्थिव शरीर पर सिर रख दिया और यादों में खो गए। सेना और एयरफोर्स अधिकारियों ने मात्र 30 मिनट में परिवार को अंतिम दर्शन कराकर पार्थिव शरीर को विशेष वाहन में रख दिया।

पार्थिव शरीर को एयरफोर्स के अधिकारी हिंडन एयरफोर्स स्टेशन से गंगासागर लेकर आए। पत्नी सोनिका को अधिकारी अलग गाड़ी में लाए थे। जैसे ही पार्थिव शरीर घर की चौखट पर पहुंचा ताऊ और ताई की हालत खराब हो गई। बागपत लेकर जाने के लिए जैसे ही सेना और एयरफोर्स के अधिकारी तैयार हुए तो पिता ने कहा कि मैं अपने बेटे के साथ ही जाऊंगा। गाड़ी में बैठे वह बार-बार बस अभिनव के पार्थिव शरीर को देखकर यही कह रहे थे कि अब मुझे कौन फोन करके कौन पूछेगा कि पापा आप कैसे हैं?

अरे अभिनव कोई निशानी तो छोड़ जाता
सभी महिलाओं के मुख से एक ही शब्द निकल रहा था कि बेटा कोई निशानी तो छोड़ देता। अपने मम्मी और पापा को जिंदगी भर का दुख दे गया। ये कैसे रहेंगे और बहन अब किसका इंतजार करेगी। अभिनव और सोनिका को शादी के बंधन में बंधे सिर्फ 17 महीने हुए हैं। उनके अभी कोई संतान नहीं थी। इसी को लेकर महिलाओं में चर्चा होती रही।

सात बजे ही घर पर बढ़ने लगी थी भीड़ 
 गंगासागर स्थित अभिनव के आवास पर सुबह सात बजे ही कॉलोनी और आसपास के लोगों की भीड़ जुटने लगी थी। जैसे ही पार्थिव शरीर पहुंचा तो सैकड़ों की भीड़ एकत्र हो गई। जगह-जगह शहीद को सलामी दी गई। 9 बजकर 42 मिनट पर विशेष वाहन बागपत रवाना हो गया था।

अपनी जान गवां कर बचा ली कई जिंदगी 
 स्क्वाड्रन लीडर अभिनव चौधरी ने आबादी पर विमान गिरने से बचाने के लिए शहादत दी। वह विमान को गांव से काफी दूर ले गए। जिससे किसी की जान को खतरा न हो। इसके लिए उन्होंने अपनी जान की परवाह भी नहीं की। इस कोशिश में जब तक वह विमान से पैराशूट लेकर बाहर निकलते, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अब उनके जाने के बाद उनकी यादें और बहादुरी के किस्से लोगों की जुबान पर हैं।

अभिनव की पत्नी सोनिका के रिश्ते के चाचा रालोद नेता कुलदीप उज्ज्वल हैं। उन्होंने बताया कि अभिनव जितने होनहार थे उतने ही जांबाज भी थे। अपनी शादी में लाखों का दहेज ठुकराकर सिर्फ एक रुपया स्वीकार करके शानदार मिसाल कायम थी। उन्हें सैन्य अधिकारियों ने बताया कि बहादुरी में भी उनका जवाब नहीं था। जिस समय अभिनव को विमान के इंजन में गड़बड़ी का पता चला तो वहां काफी आबादी थी। अभिनव चाहते तो विमान से पैराशूट के सहारे निकल सकते थे परंतु उन्होंने जान की परवाह नहीं की। वह विमान को आबादी से काफी दूर ले गए। इसके बाद उसने विमान से निकलने का प्रयास किया। लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। अपनी शहादत देकर उसने कई जिंदगी बचा ली। उसके जाने का दर्द कभी भूला नहीं जाएगा। वह हमारे दिलों में हमेशा रहेगा। 

जयंत चौधरी ने फोन पर दी सांत्वना
रालोद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयंत चौधरी ने अभिनव के पिता सतेंद्र चौधरी व ताऊ सूबे सिंह से फोन पर वार्ता कर उन्हें सांत्वना दी। इस दौरान उन्होंने कहा कि अभिनव की शहादत से पूरा देश दुखी है। ऐसे जाबांज लोग बहुत कम होते हैं। दुख की इस घड़ी में रालोद परिवार के साथ है। 

डीएम और एसपी के न आने पर रोष
अभिनव चौधरी के अंतिम संस्कार में डीएम राजकमल यादव और एसपी अभिषेक सिंह नहीं पहुंचे। इसे लेकर ग्रामीणों में रोष दिखाई दिया। उनका कहना था कि देश की सेवा करते हुए शहीद हुए अफसर के अंतिम यात्रा में अधिकारियों को आना चाहिए था।